बचपन

बचपन की वह शाम मधुर सपनो में खेला करते थे थी किसे खबर है रात निकट बेखौफ ठिठोला करते थे लेकिन डूबी यह संध्या भी…

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सिकुड़ता गणतंत्र

…जब देश के महामहिम एक विदेशी अतिथि के सामने अपने देश के वैभव-सम्पन्नता का दिखावा कर रहे होंगे तब विदर्भ का एक किसान आत्म-हत्या करने के लिए अपने गले में रस्सी डाल रहा होगा…

संपादकीय

…इंसान दो तरह से ज्ञान हासिल करता है, पहला व्यावहारिक और दूसरा सैद्धांतिक (अनुमानित) | या स्पष्ट शब्दों में “जान कर” अथवा “मान कर” | जानने और मानने में बहुत फर्क है और इन दोनों के बीच “समझ” का विशाल पहाड़ होता है…